तर्ज: सारी सारी रातें तेरी
नन्दजी का लाल थाँरी याद घणी आवे
याद घणी आवे, म्हारो जियो दुःख पावे
नन्दजी का लाल थाँरी...
थारे चरण की कान्हा, लगन लगाई है
आपको कोई न दिखे, सब हरजाई है
एकला खड़्या हाँ मनड़ो, टेर लगावे
नन्दजी का लाल थाँरी...
दुःख का भर्योड़ा म्हे तो घणा बिलखाया
मनड़ा को घड़्ल्यो आँसू, भर्योड़ो म्हे ल्याया
आँसूड़ा चरण पखारे, दूर तू क्यूँ जावे
नन्दजी का लाल थाँरी...
जिवड़ा म चैन कोनी, हिवड़े रो हाल खोटो
छोटा-छोटा टाबर थाँरा, तू ही धणी है मोटो
चरणा म चैन सगळा, दुःख मिट ज्यावे
नन्दजी का लाल थाँरी...
सगळा की बिगड़ी बणाओ, म्हारे ताईं देर क्यूँ
'शोभा' थारे शरणा माही, मति बणज्यो गैर ज्यूँ
शरणागत की पत राखो, दौड़्यो क्यूँ न आवे
नन्दजी का लाल थाँरी...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपको भजन कैसा लगा?