तर्ज: चलाओ रे साथीड़ा आपाँ
माँ सरस्वती न तू ध्यावे क्यूँ न प्राणी
हाथों में वीणा सोह्वे, वीणा पाणी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...
ज्ञान का भंडार तू तो, शारदा कहावे है
अज्ञान न भगावे तू तो, भारती कहावे है
सारे जगत म पूजा ज्यावे ज्ञानी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...
मंथरा की मति फेरी, जाणे दुनिया सारी है
भक्ति बुद्धि ज्ञान दे दो, जिस पर दुनिया वारी है
कंठ बिराजो बोलें मीठी वाणी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...
ज्ञान को भंडार तू, भंडार न तो खोल दे
साची झूठी जैसी भी है, भक्ति को तू मोल ले
'शोभा' की जिह्वा ऊपर बैठो वाणी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...
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