तर्ज: फागण आयो फागणियो रंगा दे रसिया
फागण म गुलाल खेले
नंदजी को लाल
खेले मदन गोपाल
प्यारो लागे रे
फागण म गुलाल खेल...
भर-भर मटकी गुलाल देखो घोळी है
तो भर पिचकारी म्हारे नंदजी को लाल
खेले मदन गोपाल
प्यारो लागे रे...
ग्वाल-बाल संग लियो रे कन्हाई
तो जुगत बणावे म्हारे नंदजी को लाल
खेले मदन गोपाल
प्यारो लागे रे...
बाँसुरी की टेर सुण गोपियाँ सब आई
तो ग्वाल-बाल संग रंगे नन्दलाल
खेले मदन गोपाल
प्यारो लागे रे...
राधा जब आई तो छिप गयो कन्हाई
तो भर पिचकारी मारी नन्दजी को लाल
खेले मदन गोपाल
प्यारो लागे रे...
थारी लीला को कोई पार नहीं पावे है
तो 'शोभा' की बिगड़ी बणावे नन्दलाल
खेले मदन गोपाल
प्यारो लागे रे...