तर्ज: इन हवाओं में
विघ्न निवारक मंगल दायक
गजानंद को जो प्रथम मनावे
बिगड़े सारे काम बणावे
गजानंद को जो प्रथम मनावे
भोलेनाथ जी के आँखों के तारे
कार्तिक के तुम भ्राता प्यारे
पार्वती जी की गोद बिराजो
जो भी देखे लाड लडावे
बिगड़े-बिगड़े काम सुधारो
म्हारे भी आँगण आप पधारो
जो नर तेरी भक्ति करता
श्री शारद संग रिद्धि-सिद्धि ल्यावे
प्रथम जो तुझको नहीं मनाते
काम न बनते, विघ्न ही आते
भूल बिसरकर भी जो मनाते
मूषे चढ़कर राह दिखाते हो
अक्षत-रोली-मोली-चन्दन
मन करे तेरे चरणों में वंदन
कर जोड़े 'शोभा' चरण खड़ी है
मन से जो ध्यावे, वो फल पावे