तर्ज: ऐ मेरे दिल-ए-नादान/ना स्वर है ना सरगम है
गजवदन विनायक को
हम प्रथम मनाते हैं
हर काम सफल होते
रिद्धि सिद्धि वो लाते हैं
गजवदन विनायक को...
तीनों लोकों में प्रभु
देवों से न्यारे हो
शिव-पार्वती के तुम
आँखों के तारे हो
जब तुमको बुलायें हम
मूषे चढ़ आते हो
गजवदन विनायक को...
तुम एक दन्त धारी
तेरी महिमा अति भारी
सोहे भाल-तिलक तेरे
तेरे रूप की बलिहारी
कहीं नज़र नहीं लागे
राई-लूण कराते हैं
गजवदन विनायक को...
तुम विघ्न निवारक हो
सारो सब के ही काजा
तुझे शोभा बुलाये है
मत देर करो आजा
सब तुझको मनाते हैं
और तुझको ही ध्याते हैं
गजवदन विनायक को...