तर्ज: घर आया मेरा परदेसी
अरज कराँ थाँ स्यूँ बनवारी
जल्दी टेर सुणो म्हारी
अरज कराँ...
दुखों का लग रह्या डेरा है
तेरे बिना न कोई मेरा है
चाहिए थारी दया भारी
जल्दी टेर...
जीवन दुःख का मेला है
तम चहुँ ओर में फैला है
थारी किरण चाह्वाँ दातारी
जल्दी टेर...
मैंने तो तुम्हें ही पुकारा है
तूने ही दुखियों को उबारा है
बाट उडीकुँ मैं थारी
जल्दी टेर...
रात दिवस शोभा ध्यान धरे
थारी भक्ति को गुणगान करे
पल-पल जाऊँ मैं बलिहारी
जल्दी टेर...
अरज कराँ थाँ स्यूँ बनवारी
जल्दी टेर सुणो म्हारी
अरज कराँ...
दुखों का लग रह्या डेरा है
तेरे बिना न कोई मेरा है
चाहिए थारी दया भारी
जल्दी टेर...
जीवन दुःख का मेला है
तम चहुँ ओर में फैला है
थारी किरण चाह्वाँ दातारी
जल्दी टेर...
मैंने तो तुम्हें ही पुकारा है
तूने ही दुखियों को उबारा है
बाट उडीकुँ मैं थारी
जल्दी टेर...
रात दिवस शोभा ध्यान धरे
थारी भक्ति को गुणगान करे
पल-पल जाऊँ मैं बलिहारी
जल्दी टेर...
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