तर्ज: बालम छोटो सो
आओ गजानंद महाराज कारज सारो जी
तीन लोक में सब से ऊँचे
थे हो देवों का सरताज
कारज...
माता थारी पार्वती, कोई पिता है भोलेनाथ
कारज...
गौरी के द्वारे बिराजो, थे हो मुषे पर असवार
कारज...
थारे चरणों का ध्यान धरें, हमें दे दो थोड़ा ज्ञान
कारज...
सूंड सुंडाला दूंद दुदाला, थारी छटा है अपरम्पार
कारज...
आरती उताराँ भोग लगावाँ, कोई लाडूड़ा भर थाल
कारज...
गजानंद न ध्याले, सब कुछ पा ले, थारा बिगड़्या बण सी काज
कारज...
शोभा थारो भजन सुणायो, कोई सारो सगळा काज
कारज...
आओ गजानंद महाराज कारज सारो जी
तीन लोक में सब से ऊँचे
थे हो देवों का सरताज
कारज...
माता थारी पार्वती, कोई पिता है भोलेनाथ
कारज...
गौरी के द्वारे बिराजो, थे हो मुषे पर असवार
कारज...
थारे चरणों का ध्यान धरें, हमें दे दो थोड़ा ज्ञान
कारज...
सूंड सुंडाला दूंद दुदाला, थारी छटा है अपरम्पार
कारज...
आरती उताराँ भोग लगावाँ, कोई लाडूड़ा भर थाल
कारज...
गजानंद न ध्याले, सब कुछ पा ले, थारा बिगड़्या बण सी काज
कारज...
शोभा थारो भजन सुणायो, कोई सारो सगळा काज
कारज...
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