तर्ज: थाली भर कर ल्याई
भज ले प्रभु के नाम को प्राणी
तन से, मन से, प्राण से
सगळा दुःख कट ज्यासी रे बंदा
जीवन जी ले शान से
भज ले प्रभु के...
नानी बाई ने तुझे पुकारा
रो रो नीर बहाया रे
दौड़्या-दौड़्या आया प्रभुसंग
रुक्मण भावज ल्याया रे
बाट उड़ीके भगत बुलावे तो
दौड़ बिना विमान से
भज ले प्रभु के...
माता ने दुत्कारा ध्रुव को
तप करने बन धाया है
दर्शन दे कर अपना बनाया
तो जग ने भी अपनाया है
गज ने बुलाया पल में आया
दौड़े नंगे पाँव से
भज ले प्रभु के...
देख प्रभुको भाव विह्वल हो
विदुराणी जी भागी हैं
छिलके दे के केले फेंके
ऐसी भक्ति जागी है
ऐसी भक्ति प्रभु को भावे
छिलके खाये मान से
भज ले प्रभु के...
सारे सहारे छूटे प्रभु जी
हमने तुझे बुलाया है
ऐसी भूल हुई क्या हमसे
दौड़ा क्यूँ न आया है
शोभा भज ले, दुःख मिट ज्यावे
प्रभु के सुन्दर नाम से
सगळा दुःख कट ज्यासी...
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