तर्ज: आजा आजा ओ दयालु हनुमान
बैठ्यो बण-ठण कर के नंदजी को लाल
सूरत म्हाने लागे रे प्यारी
बैठ्यो बण-ठण...
कस्तूरी तिलक शीश पर सोहे
मुकुट में मोर पंख है
घुंघराले बालों में मोती
मणियों की माला कंठ है
थारे कजरा सोहे नैना विशाल
सूरत म्हाने लागे...
कड़ल्या है हाथां म थारे
चन्दन सुभग शरीरा
बंशी तेरे होठों सजती
बजे यमुना के तीरा
सुण कर राधा दौड़े
दौड़े गोपी ग्वाल
सूरत म्हाने लागे...
काली कमरिया वालो तू है
कालो ही थारो रंग है
चाँद सो मुखड़ो प्यारो लाग
टेढ़ो-मेढ़ो ढंग है
तू तो सीधो हो ज्या
बण भगतां की ढाल
सूरत म्हाने लागे...
ओढ़ दुपट्टो जरी को बैठ्यो
पीताम्बर चमकीलो
खाटू म बण्यो श्याम धणी रे
घोड़ो थारो लीलो
'शोभा' आई थारे द्वारे चाल
सूरत म्हाने लागे...
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