तर्ज: जब तुम्हीं चले परदेस
भोले भस्मी लगाई है अंग
सती का छोड़ा संग
राम लगे प्यारा
सती-संग ने होवे गुज़ारा
भोले भस्मी लगाई...
भोले पार्वती संग जाय रहे
लक्ष्मण संग राम भी आय रहे
सीता के विरह में रोय रहे
निज-मन का चैन वो खोय रहे
शिव देख के हर्षे
ले लो नमन हमारा
सती-संग न होवे...
सती देख ये मन में भरम भरे
मानुष को कैसे नमन करे
शिव शंकर ने समझाया है
पर समझ कछु नहीं आया है
तुम ले लो परीक्षा
मिट जाये भरम तुम्हारा
सती-संग न होवे...
सती सीया के वेश में डोले हैं
तो मरम वचन प्रभु बोले हैं
बिना पिता के माँ क्यूँ डोले हैं
सती मन का भरम तब खोले हैं
सती आई है भोले पास
मन में अति भारा
सती-संग न होवे...
भोले सती से पूछ रहें बाता
सती चुप भोले समझ गए गाथा
शंकर ने मन में ठानी है
अब सती न मेरी रानी है
दो 'शोभा' को वर
बहे दृढ़ भक्ति की धारा
सती-संग न होवे...