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भोले भस्मी लगाई है अंग (तर्ज: जब तुम्हीं चले परदेस)


तर्ज: जब तुम्हीं चले परदेस


भोले भस्मी लगाई है अंग
सती का छोड़ा संग
राम लगे प्यारा
सती-संग ने होवे गुज़ारा
भोले भस्मी लगाई...

भोले पार्वती संग जाय रहे
लक्ष्मण संग राम भी आय रहे
सीता के विरह में रोय रहे
निज-मन का चैन वो खोय रहे
शिव देख के हर्षे
ले लो नमन हमारा
सती-संग न होवे...

सती देख ये मन में भरम भरे
मानुष को कैसे नमन करे
शिव शंकर ने समझाया है
पर समझ कछु नहीं आया है
तुम ले लो परीक्षा
मिट जाये भरम तुम्हारा
सती-संग न होवे...

सती सीया के वेश में डोले हैं
तो मरम वचन प्रभु बोले हैं
बिना पिता के माँ क्यूँ डोले हैं
सती मन का भरम तब खोले हैं
सती आई है भोले पास
मन में अति भारा
सती-संग न होवे...

भोले सती से पूछ रहें बाता
सती चुप भोले समझ गए गाथा
शंकर ने मन में ठानी है
अब सती न मेरी रानी है
दो 'शोभा' को वर
बहे दृढ़ भक्ति की धारा
सती-संग न होवे...

भज ले प्रभु के नाम को प्राणी (तर्ज: थाली भर कर ल्याई)


तर्ज: थाली भर कर ल्याई


भज ले प्रभु के नाम को प्राणी
तन से, मन से, प्राण से
सगळा दुःख कट ज्यासी रे बंदा
जीवन जी ले शान से
भज ले प्रभु के...

नानी बाई ने तुझे पुकारा
रो रो नीर बहाया रे
दौड़्या-दौड़्या आया प्रभुसंग
रुक्मण भावज ल्याया रे
बाट उड़ीके भगत बुलावे तो
दौड़ बिना विमान से
भज ले प्रभु के...

माता ने दुत्कारा ध्रुव को
तप करने बन धाया है
दर्शन दे कर अपना बनाया
तो जग ने भी अपनाया है
गज ने बुलाया पल में आया
दौड़े नंगे पाँव से
भज ले प्रभु के...

देख प्रभुको भाव विह्वल हो
विदुराणी जी भागी हैं
छिलके दे के केले फेंके
ऐसी भक्ति जागी है
ऐसी भक्ति प्रभु को भावे
छिलके खाये मान से
भज ले प्रभु के...

सारे सहारे छूटे प्रभु जी
हमने तुझे बुलाया है
ऐसी भूल हुई क्या हमसे
दौड़ा क्यूँ न आया है
शोभा भज ले, दुःख मिट ज्यावे
प्रभु के सुन्दर नाम से
सगळा दुःख कट ज्यासी...