तर्ज: टूटे हुए ख्वाबों ने
देखो राम लखन सीया,गंगा के किनारे हैं
हमें पार, हमें पार करो केवट
हम तेरे सहारे हैं
देखो राम लखन सीया...
लकड़ी की नाव मेरी
तेरे पाँव हैं जादू भरे
भई पत्थर की नारी
मेरा मन ये सोच डरे
ये चरण कमल तेरे
सबसे ही न्यारे हैं
हमें पार करो...
इक बात सुनो जो मेरी
फिर तुझको बिठायेंगे हम
तेरे चरण पखारेंगे
चरणोदक पायेंगे हम
जाने कितने जन्मों से
तेरी बाट निहारे हैं
हमें पार करो...
प्रभु पाँव पखारूँगा
नम देव खड़े सगरे
हौले-हौले धोये चरण
केवट आँख से अश्रु झरे
भाये प्रेम अश्रु प्रभु-मन
लगते अति प्यारे हैं
हमें पार करो...
ये तो पार करें सबको
सब के ही सहारे हैं
केवट का मान करे
और माँगे किनारे हैं
'शोभा' प्रभु को तू भज ले
बड़े भाग तुम्हारे हैं
हमें पार करो...
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