जय बोलो सब शिव भोले दातार की (तर्ज: खड़ी नीम के नीचे)


तर्ज: खड़ी नीम के नीचे


जय बोलो सब शिव भोले दातार की
भोले जी की शरण जो आया
उसकी नैया पार की

तन पर भोले छार लपेटे
गले मुंड की माला है
संग सोहे माँ पार्वती, तन
बाघम्बर का छाला है
जिसने भी दीदार किया
भव से नैया पार की
भोले जी की शरण...

तू त्रिलोचन वाला है
मस्तक पर चंदाधारा है
कामदेव पर कोप किया
तूने कामदेव को जारा है
रति को तुमने वर देकर के
दुःख की नैया पार की
भोले जी की शरण...

तूने सबको मालामाल किया
पल भर में वरदान दिया
'शोभा' ध्यावे तुझको, तूने
हर पल राम का गान किया
महामृत्युंजय का जप जो करता
मौत से नैया पार की
भोले जी की शरण...

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