जयकार करो बाबा की (तर्ज: ज़रा सामने तो आओ)

तर्ज: ज़रा सामने तो आओ

जयकार करो बाबा की
सालासर में बना देखो धाम है
सुधि लेवे पल-पल सबकी
सारे घड़ी-घड़ी भक्तों का काम है
जयकार करो बाबा की...

बाल समय जब अंजनी नंदन
भूख से गये अकुलाये
देख दिवाकर को फल समझा
पकड़न को वो धाये
लिया भानु को हाथों में थाम
डाला मुख में हो गयी शाम
सुधि लेवे पल-पल...

देखो सिंदूर को हनुमत पूछे
क्यूँ इसको है लगाया
माता बोली प्रभु मन भाया
तो हनुमंत ने भी लगाया है
आये बाबा जहाँ सीताराम हैं
तन सिंदूर मुख प्रभु नाम है
सुधि लेवे पल-पल...

लाल ही तन है, लाल ही आनन
लाल ही सोहे लंगोटा
ऐसा भक्त हुआ न होगा
हाथ में जिसके घोटा
शोभा जपे तेरा नाम है
दे दो भक्ति हम तेरे गुलाम हैं
सुधि लेवे पल-पल...

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