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जीवन दो दिन की ज़िन्दगानी (तर्ज: राजा जानी)

तर्ज: राजा जानी

जीवन दो दिन की ज़िन्दगानी
कृष्ण कहो रे प्राणी
प्रभु के नाम को रट ले रे
बंदा नाव बड़ी है पुरानी
जीवन दो दिन...

तेरा मन माया में भरमाया
तुमने समझा है जिसको साया
मरघट तक वो साथ निभाये
दुश्मन हो या जानी
जीवन दो दिन...

झूठी दुनिया ये बंधन सारा
एक नाम प्रभु का प्यारा
रोम-रोम में नाम रमा ले
यही हो मुख में बानी
जीवन दो दिन...

कोई कैसे भी इसके भावे
निश्चय उसके ये कष्ट मिटावे
जो कोई ध्यावे गले लगावे
कोई न नीचा प्राणी
जीवन दो दिन...

जिसके खेवटिया हैं कन्हैया
निश्चित पार हुई वो नैया
'शोभा' के केवट बन जाओ
जीवन गहरा पानी
जीवन दो दिन...

जयकार करो बाबा की (तर्ज: ज़रा सामने तो आओ)

तर्ज: ज़रा सामने तो आओ

जयकार करो बाबा की
सालासर में बना देखो धाम है
सुधि लेवे पल-पल सबकी
सारे घड़ी-घड़ी भक्तों का काम है
जयकार करो बाबा की...

बाल समय जब अंजनी नंदन
भूख से गये अकुलाये
देख दिवाकर को फल समझा
पकड़न को वो धाये
लिया भानु को हाथों में थाम
डाला मुख में हो गयी शाम
सुधि लेवे पल-पल...

देखो सिंदूर को हनुमत पूछे
क्यूँ इसको है लगाया
माता बोली प्रभु मन भाया
तो हनुमंत ने भी लगाया है
आये बाबा जहाँ सीताराम हैं
तन सिंदूर मुख प्रभु नाम है
सुधि लेवे पल-पल...

लाल ही तन है, लाल ही आनन
लाल ही सोहे लंगोटा
ऐसा भक्त हुआ न होगा
हाथ में जिसके घोटा
शोभा जपे तेरा नाम है
दे दो भक्ति हम तेरे गुलाम हैं
सुधि लेवे पल-पल...

जय बोलो सब शिव भोले दातार की (तर्ज: खड़ी नीम के नीचे)


तर्ज: खड़ी नीम के नीचे


जय बोलो सब शिव भोले दातार की
भोले जी की शरण जो आया
उसकी नैया पार की

तन पर भोले छार लपेटे
गले मुंड की माला है
संग सोहे माँ पार्वती, तन
बाघम्बर का छाला है
जिसने भी दीदार किया
भव से नैया पार की
भोले जी की शरण...

तू त्रिलोचन वाला है
मस्तक पर चंदाधारा है
कामदेव पर कोप किया
तूने कामदेव को जारा है
रति को तुमने वर देकर के
दुःख की नैया पार की
भोले जी की शरण...

तूने सबको मालामाल किया
पल भर में वरदान दिया
'शोभा' ध्यावे तुझको, तूने
हर पल राम का गान किया
महामृत्युंजय का जप जो करता
मौत से नैया पार की
भोले जी की शरण...