तर्ज: नगरी नगरी द्वारे द्वारेमात पिता की जो सेवा करते
भाग उन्हीं के भारी हैं
द्वारे पर प्रभु ठाढ़े रहते
जोवे बाट तुम्हारी है
मात पिता की जो...
मात-पिता से आज्ञा पा
श्रीराम तो बन को सिधाये हैं
चौदह बरस काट कर बन में
लौट अयोध्या आये हैं
घर-घर सब ने दीप जलाए
राज तिलक तैयारी है
मात पिता की जो...
वसुदेव और माता देवकी को
कंस ने बंदी बनाया है
सुना कृष्ण ने भागे आये
कंस को मार गिराया है
वसुदेव आशीषें देते
गले लगाया महतारी है
मात पिता की जो...
सरवण की गाथा सब जानें
काँधे पर बैठाया है
मात-पिता की सेवा कर के
जीवन सफल बनाया है
ऐसों को प्रभु गोद बिठायें
जो चक्र सुदर्शन धारी हैं
मात पिता की जो...
मात-पिता बड़े भाग्य से मिलते
'शोभा' ये बतलावे है
इनकी सेवा, प्रभु की सेवा
मन की शान्ति वो पावे है
मात-पिता की सेवा का फल
चारों धाम से भारी है
मात पिता की जो...
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