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म्हारा साँवरिया गिरधारी ने (तर्ज: कैसे सफरी)


तर्ज: कैसे सफरी


म्हारा साँवरिया गिरधारी ने
ध्यावे वो मौज मनावे

ये दुनिया माया का फेरा
आना जाना है
तुझको ध्याना, तुझे मनाना
तुझको पाना है
जो भी इसको ध्यावे
उसका पल में सारे कष्ट मिटावे

जीवन में जब दुःख गहरावे
इसकी शरण में आ जा
हाथ पकड़ तुझे शरण में लेगा
तेरी बचावे लाजा
उसके सारे दुःख मिट ज्यावे
भागे-भागे शरण जो आवे

'शोभा' है प्रभु शरण तिहारी
दो भक्ति का प्याला
जीवन है काँटों का बाग
तू फूल खिलाने वाला
शूल, फूल बन ज्यावे
हम सब दया जो तेरी पावे

मैं तो आई शरण तिहारी (तर्ज: पेटीवादक स्वरचित)


तर्ज: पेटीवादक स्वरचित


मैं तो आई शरण तिहारी
हारी रे हारी मैं तो
पल पल हारी

इस दुनिया की प्रभु रीत निराली
सत्य तो हारे, झूठ है भारी

हर पग पर प्रभु ठोकर खाई
तब ही तो पकड़ी बैय्याँ थारी

जीवन बन गया कटी पतंग है
थे बन जाओ डोर हमारी

दीनों के प्रभु नाथ तुम्हीं हो
देर क्यूँ मेरी आई बारी

अवलंबन तेरा हम पायें तो
विपदा कट जाये प्रभु सारी

ऐसी कृपा करो प्रभु 'शोभा' पर
बन जाये, चरण पुजारी

माँ सरस्वती न तू ध्यावे (तर्ज: चलाओ रे साथीड़ा आपाँ)


तर्ज: चलाओ रे साथीड़ा आपाँ


माँ सरस्वती न तू ध्यावे क्यूँ न प्राणी
हाथों में वीणा सोह्वे, वीणा पाणी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...

ज्ञान का भंडार तू तो, शारदा कहावे है
अज्ञान न भगावे तू तो, भारती कहावे है
सारे जगत म पूजा ज्यावे ज्ञानी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...

मंथरा की मति फेरी, जाणे दुनिया सारी है
भक्ति बुद्धि ज्ञान दे दो, जिस पर दुनिया वारी है
कंठ बिराजो बोलें मीठी वाणी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...

ज्ञान को भंडार तू, भंडार न तो खोल दे
साची झूठी जैसी भी है, भक्ति को तू मोल ले
'शोभा' की जिह्वा ऊपर बैठो वाणी
तू तो ध्यावे क्यूँ न...

मेरे श्याम प्रभु की तो (तर्ज: क्या खूब लगती हो)


तर्ज: क्या खूब लगती हो


मेरे श्याम प्रभु की तो महिमा निराली है
हैं काले-काले बाल, आँखें सुरमे वाली है
मस्तक पर मोर-मुकुट हमें अच्छा लगता है
झूठी दुनिया सारी तू सच्चा लगता है

रूठे रहोगे कब तक, बोलो कब तक
हम भी न मानेंगे तुम न आओगे जब तक
जीवन का हर रिश्ता हमें कच्चा लगता है
झूठी दुनिया सारी...

मेरे नैनन बीच समाओ, हाँ समाओ
मेरे मन मंदिर में भक्ति का दीप जलाओ
भक्ति का दीपक हमको अच्छा लगता है
झूठी दुनिया सारी...

मैंने लिया आसरा तेरा, हाँ तेरा
तुझे 'शोभा' पुकारे, बनना होगा मेरा
तुम मेरे मन में बसों हमें अच्छा लगता है
झूठी दुनिया सारी...

माँ सरस्वती का धर ध्यान

माँ सरस्वती का धर ध्यान
दे विद्या दान
न संशय आन
करे कल्याणा
तू हर पल ध्यान लगाना

तन श्वेताम्बर तेरे सोहे
हाथों में वीणा मोहे
इस छटा को देख मेरा
मन हो गया दीवाना

तेरे चरणों में हम हैं आये
वर ज्ञान का तुझसे पाये
तुम मन में मेरे
ज्ञान का दीप जलाना

आरूढ़ हो हंस पे आओ
आसन मन-बीच लगाओ
आकर के ख़त्म करो
ये तम का खजाना

जिसने भी तुझको ध्याया
अंधियारा तुमने भगाया
बन गया वो ज्ञानी
बन गया चतुर सुजाना

'शोभा' चरणों में टेके माथा
तुम धरो शीश पर हाथा
तेरे चरणों में शीश नवाये
ये सारा ज़माना

मात पिता की जो सेवा करते (तर्ज: नगरी नगरी द्वारे द्वारे)


तर्ज: नगरी नगरी द्वारे द्वारे

मात पिता की जो सेवा करते
भाग उन्हीं के भारी हैं
द्वारे पर प्रभु ठाढ़े रहते
जोवे बाट तुम्हारी है
मात पिता की जो...

मात-पिता से आज्ञा पा
श्रीराम तो बन को सिधाये हैं
चौदह बरस काट कर बन में
लौट अयोध्या आये हैं
घर-घर सब ने दीप जलाए
राज तिलक तैयारी है
मात पिता की जो...

वसुदेव और माता देवकी को
कंस ने बंदी बनाया है
सुना कृष्ण ने भागे आये
कंस को मार गिराया है
वसुदेव आशीषें देते
गले लगाया महतारी है
मात पिता की जो...

सरवण की गाथा सब जानें
काँधे पर बैठाया है
मात-पिता की सेवा कर के
जीवन सफल बनाया है
ऐसों को प्रभु गोद बिठायें
जो चक्र सुदर्शन धारी हैं
मात पिता की जो...

मात-पिता बड़े भाग्य से मिलते
'शोभा' ये बतलावे है
इनकी सेवा, प्रभु की सेवा
मन की शान्ति वो पावे है
मात-पिता की सेवा का फल
चारों धाम से भारी है
मात पिता की जो...