राम रसियो रे म्हारे मन बसियो


राम रसियो रे म्हारे मन बसियो
बजरंग अंजनी रो लाल राम रसियो

मात सीया को पतो लगा स्यूँ, हनुमत कहियो
माता न देखी हनुमत मन, दुःख भरियो
राम रसियो रे...

मात सिया पहिं आयो हनुमत, मुंदड़ी दईयो
माता न दी आशीष मन, ख़ुशी भरियो
राम रसियो रे...

दुखड़ा मेटूँ भगतां का, कमर कसियो
भक्त बुलावे, दौड़े घोटो, हाथ रखियो
राम रसियो रे...

सभा बीच म माला पेर, हनुमत हँसियो
जिस मणिया म राम नहीं, मन नहीं जचियो
राम रसियो रे...

सभा बीच म सीनो फाड़्यो, राम रसियो
बैठ्या सीता-राम संग म, लक्ष्मण भईयो
राम रसियो रे...

भगतां क हिवड़ा म, हनुमत बसियो
'शोभा' ध्यावे, थाने मनावे, दुःख हरियो
राम रसियो रे...

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