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राम को भज ले (तर्ज: बींद बणूलो घोड़ी चढ़ूँ लो)


तर्ज: बींद बणूलो घोड़ी चढ़ूँ लो / हे भगवान तेरी माया का


राम को भज ले, राज तू कर ले
राम नाम है रस प्याला
कृष्ण को भज ले, कष्ट मिटा ले
कृष्ण नाम है मधुप्याला

राम नाम के मंत्र से सागर
लांघ गए अंजनी लाला
राम नाम की चिंगारी से
लंका में लग गयी ज्वाला

राणा ने विष का प्याला भेजा
मीरा ने भोग लगा डाला
भोग लिया है कृष्ण ने विष का
विष को अमृत कर डाला

मुनि संग आये, असुरों को मारे
जनकपुरी डेरा डाला
खंडित चाप धरणी पर सोहे
गल बिच सोहे वर माला

सभा बीच में द्रुपद सुता की
लाज की टूट रही माला
कृष्ण-कृष्ण कर रुदन करे है
कहाँ छुपे हो नंदलाला

छप्पन भोग को त्याग कन्हैय्या
दौड़ पड़े हैं बेहाला
चीर बढ़ाया लाज बचाई
भगतों की भीड़ का रखवाला

चाख-चाख कर भीलणी देखे
बेर को जूठा कर डाला
भगती भावे कछु न सुहावे
भगतों से जब भी पड़ा पाला

ये हैं कृपालु 'शोभा' भज लो
छोड़ दो थोड़ी जग जाला
रोम-रोम में राम रमा ले
कृष्ण कहो मुख क्यूँ ताला

राम रसियो रे म्हारे मन बसियो


राम रसियो रे म्हारे मन बसियो
बजरंग अंजनी रो लाल राम रसियो

मात सीया को पतो लगा स्यूँ, हनुमत कहियो
माता न देखी हनुमत मन, दुःख भरियो
राम रसियो रे...

मात सिया पहिं आयो हनुमत, मुंदड़ी दईयो
माता न दी आशीष मन, ख़ुशी भरियो
राम रसियो रे...

दुखड़ा मेटूँ भगतां का, कमर कसियो
भक्त बुलावे, दौड़े घोटो, हाथ रखियो
राम रसियो रे...

सभा बीच म माला पेर, हनुमत हँसियो
जिस मणिया म राम नहीं, मन नहीं जचियो
राम रसियो रे...

सभा बीच म सीनो फाड़्यो, राम रसियो
बैठ्या सीता-राम संग म, लक्ष्मण भईयो
राम रसियो रे...

भगतां क हिवड़ा म, हनुमत बसियो
'शोभा' ध्यावे, थाने मनावे, दुःख हरियो
राम रसियो रे...

राम राम रटे राम (तर्ज: नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा)


तर्ज: नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा


राम राम रटे राम
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

राम नाम का ओढ़ दुशाला
खो गए अंजनी नंदा
राम रटे हनुमंता
राम नाम की गूँज लगाकर
पहुँच गए गढ़ लंका
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

भक्त विभीषण के घर आये
देख चौक-बीच बृंदा
राम रटे हनुमंता
मात सीया के पास हैं आये
सीया के मन हुई शंका
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

अतुलित रूप सीया ने देखा
गयी मन की सब शंका
राम रटे हनुमंता
रावण के दरबार है ठाड़े
हो कर बहुत निशंका
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

आग लगाई कपि के पूँछा
तो जला दई गढ़ लंका
राम रटे हनुमंता
लंका जारी प्रभु पहिं आये
बजा के युद्ध का डंका
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

प्रभु चरणों में लोट गए हैं
चरण धोए अश्रु गंगा
राम रटे हनुमंता
सारी करणी, हनुमत बरणी
प्रभु ने लगा लिया अंगा
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

रावण मारे, दुष्ट संहारे
पल-पल कपि प्रभु संगा
राम रटे हनुमंता
रोम रोम में राम समाये
तुम हो वीर रण बंका
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

'शोभा' ने चरणों का ध्यान लगाया
काटो यम का फंदा
राम रटे हनुमंता
राम राम रटे राम...

राम जी को ध्यान मन कृष्ण में लगाजे रे (तर्ज: नाचे नन्दलाल नचावे बाँकी मैय्या)


तर्ज: नाचे नन्दलाल नचावे बाँकी मैय्या


राम जी को ध्यान मन कृष्ण में लगाजे रे
दुःख मिटे सारा सुख का ढोल-नगाड़ा बाजे रे

कृष्ण के हाथ मुरलिया सोवे
राम जी के कर देखो धनुष विराजे रे

मोर पाँख कृष्णा सिर सोवे
राम जी के शीश पर मुकुट विराजे रे

राधा जी बृषभानु दुलारी
हृदय पटल पर राधा जी विराजे रे

जनकपुरी में धनुष को तोड़ा
सीता जी की माला गले राम के विराजे रे

कृष्ण ने कंस को मार गिराया
रावण शीश धरा-धूल में साजे रे

कृष्ण नाम 'शोभा' सुख आधारा
राम जी के नाम से दुःख सारा भाजे रे

राम नाम की नौका चढ़ प्राणी (तर्ज: जाने वो कैसे लोग थे जिनके)


तर्ज: जाने वो कैसे लोग थे जिनके


राम नाम की नौका चढ़ प्राणी
भव को पार कर ले
सत-संगत की अनल है जिसमें
मोह-तम जाये जले

झूठी मोह-माया में फँसकर
सच को छोड़ दिया
नाम प्रभु का सच्चा तूने
मुँह क्यूँ मोड़ लिया
लगन लगा ले, नाम को गा ले
जाये उमरिया ढले
राम नाम की...

लोभ-लाभ का तू करता है
हाथ न कछु आये
महल-मालिया छोड़ के बंदा
खाली हाथ जाये
मानव-दुश्मन, मोहे माया
संग न कौड़ी चले
राम नाम की...

मानव-जनम अमोलक है
ये बिरथा क्यूँ खोवे
ज्ञान-भक्ति की कर ले कमाई
जनम सफल होवे
राम को गा ले 'शोभा'
मन में बसा ले
राम से जग ये चले
राम नाम की...