तर्ज: बींद बणूलो घोड़ी चढ़ूँ लो / हे भगवान तेरी माया का
राम को भज ले, राज तू कर ले
राम नाम है रस प्याला
कृष्ण को भज ले, कष्ट मिटा ले
कृष्ण नाम है मधुप्याला
राम नाम के मंत्र से सागर
लांघ गए अंजनी लाला
राम नाम की चिंगारी से
लंका में लग गयी ज्वाला
राणा ने विष का प्याला भेजा
मीरा ने भोग लगा डाला
भोग लिया है कृष्ण ने विष का
विष को अमृत कर डाला
मुनि संग आये, असुरों को मारे
जनकपुरी डेरा डाला
खंडित चाप धरणी पर सोहे
गल बिच सोहे वर माला
सभा बीच में द्रुपद सुता की
लाज की टूट रही माला
कृष्ण-कृष्ण कर रुदन करे है
कहाँ छुपे हो नंदलाला
छप्पन भोग को त्याग कन्हैय्या
दौड़ पड़े हैं बेहाला
चीर बढ़ाया लाज बचाई
भगतों की भीड़ का रखवाला
चाख-चाख कर भीलणी देखे
बेर को जूठा कर डाला
भगती भावे कछु न सुहावे
भगतों से जब भी पड़ा पाला
ये हैं कृपालु 'शोभा' भज लो
छोड़ दो थोड़ी जग जाला
रोम-रोम में राम रमा ले
कृष्ण कहो मुख क्यूँ ताला
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