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इस जग से हम प्रीत लगाकर (तर्ज: मैं तो तुम संग प्रीत लगाकर)

तर्ज: मैं तो तुम संग प्रीत लगाकर

इस जग से हम प्रीत लगाकर
हार गये कृष्णा
हार गये कृष्णा

जो रिश्ते इस मन को भाये
मन था नादाँ, सब थे पराये
जो भी आये चोट लगाये
ऐसे गिरे प्रभु कोई ना थामा
आये हैं तेरे अंगना
हार गये कृष्णा
इस जग से...

हर दुःख ने प्रभु ऐसा जकड़ा
जीवन बन गया अश्म का टुकड़ा
तुम ही जानो मेरा दुखड़ा
सावन की प्रभु झड़ी लग जाती
बहते हैं जब नैना
हार गये कृष्णा
इस जग से...

'शोभा' की नैया तेरे हवाले
पार उतारो चाहे डूबा ले
आँखों में धारें
मुख जड़े ताले
उर तू समाया, जिया भर आया
मुख निकसे न बिना
हार गये कृष्णा
इस जग से...

इन छोटो सो मत जाण (तर्ज: बालम छोटो सो)

तर्ज: बालम छोटो सो

इन छोटो सो मत जाण
ओ तो मोटो सो
सारे बिगड़्या सारा काज
ओ तो मोटो सो
इन छोटो सो...

छोटा-छोटा पग्ल्याँ म पायल बाजे
अटक-अटक कर पग्ल्याँ न राखे
भगत बुलावे तो दौड़्यो-दौड़्यो भाजे
नाप पल म कोस हजार
ओ तो मोटो सो...

छोटा-छोटा हाथाँ म बाँसुरिया सुहावे
मिसरी ज्यूँ मीठी मनड़ा न भावे
द्रौपदी बुलायी तो दौड़्यो-दौड़्यो आयो
कोई चीर बढ़ायो अपार
ओ तो मोटो सो...

भगताँ रा पल-पल कारज सारो
'शोभा' न भी थारे चरणाँ म घालो
भवसागर से पार उतारो
कोई बण जावो खेवणहार
ओ तो मोटो सो...