कान्हा ओ कान्हा (तर्ज: तू कितनी अच्छी है)


तर्ज: तू कितनी अच्छी है


दुःख से हारे हैं, तेरे द्वारे हैं
तेरा सहारा है
कान्हा ओ कान्हा
तू तो प्यारा है, सब से न्यारा है
भक्तों का तारा है
कान्हा ओ कान्हा

दुःख ने ही तेरी राह दिखाई
काँटों के पथ से चलकर आए
तुझ बिन कौन सहाई
दुखों ने मारा है, मन ये हारा है
इक तू यारा है
कान्हा ओ कान्हा...

तूने तो कितनों की बिगड़ी बनाई
मेरी बारी आई तो फिर
देर क्यूँ इतनी लगाई
तेरा ये द्वारा है, मेरा सहारा है
तुझको पुकारा है
कान्हा ओ कान्हा...

अब नहीं कान्हा देर लगाओ
रो-रो 'शोभा' हारी अब तो
बिगड़ी आन बनाओ
जीवन खारा है, इक तू प्यारा है
तू ही हमारा है
कान्हा ओ कान्हा...

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