K लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
K लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

कैसे प्रभु मैं तुझको मन में बसाऊँ (तर्ज: मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये)


तर्ज: मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये


कैसे प्रभु मैं तुझको मन में बसाऊँ
कैसे आनंद में भर, भजनों को गाऊँ

मन मेरा तार-तार, दिल पर है ताला
आँखों मैं है प्रभु, अश्रुओं की माला
अश्रुओं की हार तुझको कैसे चढ़ाऊँ
कैसे प्रभु मैं तुझको नयन बसाऊँ

दुखों की बेड़ियाँ है, हथकड़ियाँ हाथों में
दिल जैसे जार-जार, ज़माने की बातों में
नमन में हाथों को कैसे उठाऊँ
कैसे मैं चलकर तेरे दर पर आऊँ

दुनिया से हारे 'शोभा', तेरे सहारे
सब के सहारे प्रभु, चरण बिठा ले
चरणों से हाथों को कभी न हटाऊँ
फिर तो मैं चल कर तेरे दर पर आऊँ

तुझको प्रभु मैं अपने नयन बसाऊँ
तुझको प्रभु मैं अपने मन में बसाऊँ
भर-भर आनंद तेरे भजनों को गाऊँ

कृष्ण कन्हैया दाऊजी के भईया (तर्ज: जादूगर सैयाँ)


तर्ज: जादूगर सैयाँ


कृष्ण कन्हैया दाऊजी के भईया
आई शरण मैं आज, नैया पार करो

नाव पुरानी डगमग डोले, पार हो कैसे बताओ
सागर गहरा, दूर है मंज़िल, आकर पार लगाओ
माझी बण जाओ प्रभुजी आज नैया पार करो
कृष्ण कन्हैया...

तेरी दया तरुवर की छाया, दे दो प्रभुजी सहारा
सूरज से तपते जीवन पर, बरसाओ बूँदों की धारा
बण जावो नी मेघ मल्हार, नैया पार करो
कृष्ण कन्हैया...

थारी दया हो तो दुःख मिट ज्यावे, मुझको भरोसा भारी
थारी भक्ति बिना नर दुःख पावे, कटे नहीं फंद म्हारी
'शोभा' कर ले भक्ति आज, नैया पार करो
कृष्ण कन्हैया...

कन्हैया सुने न कोई बात (तर्ज: कन्हैया ले चल परली पार)


तर्ज: कन्हैया ले चल परली पार


राधा तेरा जादू-टोना
जप तप हम भी तो जानें
तीन लोक का नाथ दीवाना
तेरा कहना माने

तेरा दीवाना देवर बन मेरे
घर में रहे, न करे काम
दीवाने को काम सिखा दे
दोनों रास-रचो आठों याम


कन्हैया सुने न कोई बात
राधा तेरी सुनता है
मेरी करवा दो मुलाकात

मूक हुई है ऐसी वाणी
रूठ गयी जैसे वीणा-पाणी
ले के कन्हैया को संग आ जाओ
करूँ शिकवा हजारों बात
कन्हैया सुने न कोई...

जीवन जैसे थम सा गया है
रोम-रोम गम रम सा गया है
ले के कन्हैया को संग आ जाओ
गम की कहाँ बिसात
कन्हैया सुने न कोई...

मरुधर में हम खड़े हुए हैं
तपती धूप में पड़े हुए हैं
ले के कन्हैया को संग आओ
हो सावन की बरसात
कन्हैया सुने न कोई...

बीहड़ बन घनघोर अँधेरा
'शोभा' के जीवन का सबेरा
ले के कन्हैया संग आओ
हो इन्द्रधनुषी परभात
कन्हैया सुने न कोई...

कन्हैया सुनेगा सारी बात
तेरे संग टले न कोई बात
तेरे संग रास रचाने की रात
कन्हैया सुनेगा सारी बात

कान्हा ओ कान्हा (तर्ज: तू कितनी अच्छी है)


तर्ज: तू कितनी अच्छी है


दुःख से हारे हैं, तेरे द्वारे हैं
तेरा सहारा है
कान्हा ओ कान्हा
तू तो प्यारा है, सब से न्यारा है
भक्तों का तारा है
कान्हा ओ कान्हा

दुःख ने ही तेरी राह दिखाई
काँटों के पथ से चलकर आए
तुझ बिन कौन सहाई
दुखों ने मारा है, मन ये हारा है
इक तू यारा है
कान्हा ओ कान्हा...

तूने तो कितनों की बिगड़ी बनाई
मेरी बारी आई तो फिर
देर क्यूँ इतनी लगाई
तेरा ये द्वारा है, मेरा सहारा है
तुझको पुकारा है
कान्हा ओ कान्हा...

अब नहीं कान्हा देर लगाओ
रो-रो 'शोभा' हारी अब तो
बिगड़ी आन बनाओ
जीवन खारा है, इक तू प्यारा है
तू ही हमारा है
कान्हा ओ कान्हा...

कृष्ण कान्हा को बना लो (तर्ज: मेरे मितवा मेरे मीत रे)


तर्ज: मेरे मितवा मेरे मीत रे


कृष्ण कान्हा को बना लो अपना मीत रे
ये निभाएगा सबकी प्रीत रे

प्यार है भक्तों से, दया के हैं सागर
आँखों से करुणा बरसे, कृपा की हैं गागर
इसको मना ले, अपना बना ले
जीवन जाएगा जीत रे

भक्तों से इक पल भी दूर नहीं हैं
जैसे कृष्ण बिना, सूर नहीं हैं
सूर ने ध्याया, कृष्ण को पाया
भूले गर्मी-शीत रे

इक बार ध्याओगे, सौ बार आएगा
सरगम की ताल पे बंशी बजाएगा
तुझको झुमाएगा, तेरे संग गायेगा
जीवन बन जाए गीत रे

तेरे ही चरणों में शीश है झुकाना
'शोभा' कहे कहीं और नहीं जाना
रोम-रोम में भाव में जगा लो
जाए उमरिया बीत रे

क्या राजा क्या रैदास (तर्ज: छोड़ गए बालम)


तर्ज: छोड़ गए बालम


क्या राजा क्या रैदास
सब छोड़-छोड़ कर चले गए
कब किसने निभाया साथ
कर वादे तोड़ कर चले गए

फूँक निकल जाएगी तन से
अर्थी तुरंत सजायेंगे
चार लोग काँधे पर थामे
मरघट तक ले जाएँगे
इस अंतिम पथ पर आज
मुख मोड़-मोड़ सब चले गए
क्या राजा क्या रैदास...

इस रस्ते से सबको है जाना
डेरा वहीं लगाना है
नेक भलाई की ले-ले खर्ची
फिर क्यूँ कर पछताना है
पछताए न बनती बात
जब साँसों का दामन तोड़ गए
क्या राजा क्या रैदास...

मन सब जाने फिर भी न माने
माया में फँसता जाए
तेरी-मेरी कर के पाप की
मटकी को भरता जाए
पाए प्रभु-चरणों में धाम
गर मटकी को फोड़ के चले गए
क्या राजा क्या रैदास...

कोई न अपना, कोई पराया
कोई न देगा साथ
'शोभा' कहे गोपाल भजो रे
पकड़ेगा वो ही हाथ
तेरा प्रभु ही निभाये साथ
गर नाम की चादर ओढ़ गए
क्या राजा क्या रैदास...

कृष्ण को नाम अति मीठो (तर्ज: पारंपरिक)


तर्ज: पारंपरिक


कृष्ण को नाम अति मीठो
हाँ रे म्हाने
दुनिया को रस लागे फीको

किस-विद थारी महिमा गाऊँ
तू तो दयालु बड़ो नीको

बालपणे में माटी खाई
मान बढ़ायो धरणी को

मीरा बुलायो दौड़्यो-दौड़्यो आयो
अमृत भयो विष तीखो

धन्ना को खेत बिना बीज उगायो
ह्रदय-दीप भगती को

नानी बाई को भात भर्यो है
काज कर्यो नरसी को

'शोभा' थारे चरणाँ म आई
रस दे द्यो भगती को

कर लो गणपति का वंदन आज (तर्ज: ऐ मालिक तेरे बंदे हम)


तर्ज: ऐ मालिक तेरे बंदे हम


कर लो गणपति का वंदन आज
तेरे बिगड़े सँवारे सब काज
तेरे संग-संग चले
हर दुविधा से टले
ये तो रिद्धि-सिद्धि के हैं सरताज

लिए फूलों का हार हम खड़े
तेरे चरणों में आन पड़े
हाथ मोदक का थाल
जिसकी खुशबू कमाल
संग भाव भी हैं मेरे भरे
रोली-मोली भी मेरे साथ
भर लो मोदक से दोनों हाथ
कर लो गणपति का...

ऊँची चौकी पर तुझको बिठाएँ
रोली-मोली और माला पहनाएँ
लटके कानों में कुण्डल
छम-छम पाँवों में पायल
तेरे माथे पर तिलक लगाएँ
सोहे कंगन तुम्हारे हाथ
करो कृपा की प्रभु बरसात
कर लो गणपति का...

जो जिस कारज से ध्यावे
मूषे चढ़ दौड़े-दौड़े आवे
सोहे पीत-वसन
तू तो करुणा नयन
तेरी छटा हम कैसे गायें
लूण राई है 'शोभा' के हाथ
हम तो भजन सुनाएँ सारी रात
कर लो गणपति का...

कृष्ण को जनम हुयो है आज


तर्ज: श्याम म्हाने चाकर राखोजी


कृष्ण को जनम हुयो है आज
दे दे ताली कृष्ण रिझाओ
कोई नाचो दे दे ताल

घर-घर में तो बँटत बधाई
भीड़ नन्द के द्वार
देख-देख सब मगन भये हैं
शोभा अति विशाल

श्याम सलोनी सुन्दर सूरत
नैनन सुरमा घाल
इस छवियन को देख सभी के
नैना हो गये चार

सूए जैसी नाक प्रभु के
पंखुड़ी होंठ गुलाब
छोटे-छोटे चरण कमल प्रभु तेरे
मेरे मनड़े रे बीच बिराज

काम-कोटि इस छवि पर वारी
हो रहे सभी निहाल
हमको भी प्रभु दरश दिखाओ
आये हैं तेरे द्वार

छोटी-छोटी भुजा पसारे
भक्तों के लिए है प्यार
शोभा को प्रभु शरण में राखो
जैसे गल बिच हार