बड़ो ही नटखट बड़ो हठीलो (तर्ज: सबसे निराली महिमा है भारी)

तर्ज: सबसे निराली महिमा है भारी

बड़ो ही नटखट बड़ो हठीलो
है ओ म्हारो कान्हजी
जय बोलो यशोदा के लाल की
जय बोलो यशोदा के लाल की
बड़ो ही नटखट...

माँ यशोदा न खूब सतायो, कान्हजी प्यारा कान्हजी
चोर-चोर कर माखन खायो, कान्हजी प्यारा कान्हजी
कंकरिया मार कर मटकी फोड़ी, नंद बाबा को लाल जी
जय बोलो यशोदा...

ग्वालों की टोली खेलने को आई, कान्हजी प्यारा कान्हजी
संग में थे मोहन यदुराई, कान्हजी प्यारा कान्हजी
खेलत गेंद यमुना म गिरायी, कान्हजी प्यारा कान्हजी
कूद पड़े यमुना में कन्हाई, नाथ दियो कालो नाग जी
जय बोलो यशोदा...

शोभा थारो भजन बणायो, कान्हजी प्यारा कान्हजी
भजन बणायो प्रेम से गायो, कान्हजी प्यारा कान्हजी
भक्तों का बेड़ा पार करो जो, प्रेम से लगावे थाँरो ध्यान जी
जय बोलो यशोदा...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपको भजन कैसा लगा?