ध्याले बंशीवाले न दिन-रात (तर्ज: तूने हीरो सो जनम गँवायो)

तर्ज: तूने हीरो सो जनम गँवायो
ध्याले बंशीवाले न दिन-रात
दुःख सगळा कट ज्यासी

मन अभिमानी, बहुत गुमानी
खुद पर ही इतरायो
ठोकर पर जद ठोकर लागी
भाग शरण थारी आयो
दुःख सगळा कट ज्यासी...

दया की सरि हो, दया का सागर
दया थोड़ी बरसावो
दीना के थे नाथ कुहावो
दीना न मत ठुकरावो
दुःख सगळा कट ज्यासी...

तू मेरे मन में, इस जीवन के
कण-कण में बस जावो
श्वाँस-श्वाँस में तेरी भक्ति
ऐसे प्रभु जी रम जावो
दुःख सगळा कट ज्यासी...

इतनी दया तुम करो प्रभु जी
मन विश्वास न टूटे
भक्ति मन में हो या नाहि
जिह्वा से नाम न छूटे
दुःख सगळा कट ज्यासी...

थारे चरण को शरण्यो लीन्यो
तू ही पार लगावे
शोभा क हिवड़ा म ज्योत जला द
मन चरणाँ म लिपटावे
दुःख सगळा कट ज्यासी...

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