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तुझे अपना बना बैठे (तर्ज: लगन तुझसे लगा बैठे)


तर्ज: लगन तुझसे लगा बैठे


तुझे अपना बना बैठे
जो होगा देखा जाएगा

निछावर कर दिया जीवन
तेरे दर्शन को पाने को
खुद हस्ती हम मिटा बैठें
जो होगा देखा जाएगा

दिया है दिल से जो तुम ने
लिया है दिल से वो हम ने
सुधा-सम विष भी पी बैठें
जो होगा देखा जाएगा

पीये हैं अश्क आँखों से
तुझे पाने की ज़िद में हम
तुझे कर्जा लगा बैठें
जो होगा देखा जाएगा

जगत के रंग से क्या जोड़ें
जो हर पल रंग बदलता है
ये श्यामल रंग लगा बैठें
जो होगा देखा जाएगा

डुबाए या किनारा दे
तेरी मर्ज़ी में हम शामिल
तुझे साहिल बना बैठें
जो होगा देखा जाएगा

कभी दर-दर न भटकें, और
किसी दर पर न जाएँगे
तुझे दर पर बिठा बैठें
जो होगा देखा जाएगा

तेरे चरणों में 'शोभा' है
तुझे पाने की धुन में सुन
अब हम जो रूठ बैठेंगे
अकेला खुद को पाएगा

थारी कौड़ी-कौड़ी जोड़ी माया (तर्ज: थारी काया रो गुलाबी रंग)


तर्ज: थारी काया रो गुलाबी रंग


थारी कौड़ी-कौड़ी जोड़ी माया रह ज्यासी
रह ज्यासी, बेटा-पोता खा सी

तिकड़म का तूने जाल बिछाया
खुद को तूने चतुर बताया
चतुराई थारी रह ज्यासी
जद काल सिरहाने आ ज्यासी
थारी कौड़ी-कौड़ी...

झूठ कपट से खूब कमाया
सुन्दर-सुन्दर महल बणाया
झूठ-कपट थारे संग ज्यासी
जद काल सिरहाने आ ज्यासी
थारी कौड़ी-कौड़ी...

राम नाम की धुनी रमा ले
कृष्ण नाम 'शोभा' मन में बसा ले
हाथों से थोड़ा पुण्य कमा ले
पुण्य है थारो संग-साथी
जद काल सिरहाने आ ज्यासी
थारी कौड़ी-कौड़ी...

टेर सुनो म्हारी नंदजी के लाला (तर्ज: खम्मा खम्मा हो धणिया रूणीचेरा रामदेव)


तर्ज: खम्मा खम्मा हो धणिया रूणीचेरा रामदेव


टेर सुनो म्हारी नंदजी के लाला
तार-तार मनड़ो म्हारो दुःख भारा
म्हारी नंदजी के लाला...

जीवन है काँटों की सैय्या
तू फूलों का हार है
जीवन है ये नाग सरिसा
तू अमृत की धार है
जीवन पर बरसो बन कर अमृत धारा
म्हारी नंदजी के लाला...

ना चंदन, ना चावल चीनी
ना पूजा, ना बाती
आँखों में आँसू की धारा
तेरी याद सताती
तेरी दया से रुके अश्रु धारा
म्हारी नंदजी के लाला...

पल-पल तिल-तिल जलता जीवन
ढलती जाए शाम है
'शोभा' गावे रोम-रोम से
सुन्दर प्यारो श्याम है
प्यासे हैं बन जाओ जल-धारा
म्हारी नंदजी के लाला...

तू रट ले कृष्णा को बंदे (तर्ज: मुझे है काम ईश्वर से)


तर्ज: मुझे है काम ईश्वर से


तू रट ले कृष्णा को बंदे
जगत को छोड़ जाना है
तू तज दे तृष्णा को बंदे
रिश्तों को तोड़ जाना है

नींद में सोया है बंदे
स्वप्न में खोया है बंदे
सत्य जिसे समझा है बंदे
ये लिपटे झूठ के फंदे
तू मृगतृष्णा को तज बंदे
जग से मुँह मोड़ जाना है

तू रखता एक पग धरणी
करो नहीं दूसरे की आस
निकल जाएगी जब ये श्वाँस
रहे ना तेरे कोई पास
ये काया कुंदना सी बंदे
छार बन छोड़ जाना है

लगा ले बीज भक्ति का
भजन की 'शोभा' कर खेती
तू सींच ले प्रेम जल अश्रु
दे बीज पे भाव की रेती
लगे तरु चंदना के बंदे
महक जग छोड़ जाना है

ध्याले बंशीवाले न दिन-रात (तर्ज: तूने हीरो सो जनम गँवायो)

तर्ज: तूने हीरो सो जनम गँवायो
ध्याले बंशीवाले न दिन-रात
दुःख सगळा कट ज्यासी

मन अभिमानी, बहुत गुमानी
खुद पर ही इतरायो
ठोकर पर जद ठोकर लागी
भाग शरण थारी आयो
दुःख सगळा कट ज्यासी...

दया की सरि हो, दया का सागर
दया थोड़ी बरसावो
दीना के थे नाथ कुहावो
दीना न मत ठुकरावो
दुःख सगळा कट ज्यासी...

तू मेरे मन में, इस जीवन के
कण-कण में बस जावो
श्वाँस-श्वाँस में तेरी भक्ति
ऐसे प्रभु जी रम जावो
दुःख सगळा कट ज्यासी...

इतनी दया तुम करो प्रभु जी
मन विश्वास न टूटे
भक्ति मन में हो या नाहि
जिह्वा से नाम न छूटे
दुःख सगळा कट ज्यासी...

थारे चरण को शरण्यो लीन्यो
तू ही पार लगावे
शोभा क हिवड़ा म ज्योत जला द
मन चरणाँ म लिपटावे
दुःख सगळा कट ज्यासी...