तर्ज: ऐ मालिक तेरे बंदे हम
कर लो गणपति का वंदन आज
तेरे बिगड़े सँवारे सब काज
तेरे संग-संग चले
हर दुविधा से टले
ये तो रिद्धि-सिद्धि के हैं सरताज
लिए फूलों का हार हम खड़े
तेरे चरणों में आन पड़े
हाथ मोदक का थाल
जिसकी खुशबू कमाल
संग भाव भी हैं मेरे भरे
रोली-मोली भी मेरे साथ
भर लो मोदक से दोनों हाथ
कर लो गणपति का...
ऊँची चौकी पर तुझको बिठाएँ
रोली-मोली और माला पहनाएँ
लटके कानों में कुण्डल
छम-छम पाँवों में पायल
तेरे माथे पर तिलक लगाएँ
सोहे कंगन तुम्हारे हाथ
करो कृपा की प्रभु बरसात
कर लो गणपति का...
जो जिस कारज से ध्यावे
मूषे चढ़ दौड़े-दौड़े आवे
सोहे पीत-वसन
तू तो करुणा नयन
तेरी छटा हम कैसे गायें
लूण राई है 'शोभा' के हाथ
हम तो भजन सुनाएँ सारी रात
कर लो गणपति का...
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