तर्ज: जाने वो कैसे लोग थे जिनके
राम नाम की नौका चढ़ प्राणी
भव को पार कर ले
सत-संगत की अनल है जिसमें
मोह-तम जाये जले
झूठी मोह-माया में फँसकर
सच को छोड़ दिया
नाम प्रभु का सच्चा तूने
मुँह क्यूँ मोड़ लिया
लगन लगा ले, नाम को गा ले
जाये उमरिया ढले
राम नाम की...
लोभ-लाभ का तू करता है
हाथ न कछु आये
महल-मालिया छोड़ के बंदा
खाली हाथ जाये
मानव-दुश्मन, मोहे माया
संग न कौड़ी चले
राम नाम की...
मानव-जनम अमोलक है
ये बिरथा क्यूँ खोवे
ज्ञान-भक्ति की कर ले कमाई
जनम सफल होवे
राम को गा ले 'शोभा'
मन में बसा ले
राम से जग ये चले
राम नाम की...
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