तर्ज: पारंपरिककृष्ण को नाम अति मीठो
हाँ रे म्हाने
दुनिया को रस लागे फीको
किस-विद थारी महिमा गाऊँ
तू तो दयालु बड़ो नीको
बालपणे में माटी खाई
मान बढ़ायो धरणी को
मीरा बुलायो दौड़्यो-दौड़्यो आयो
अमृत भयो विष तीखो
धन्ना को खेत बिना बीज उगायो
ह्रदय-दीप भगती को
नानी बाई को भात भर्यो है
काज कर्यो नरसी को
'शोभा' थारे चरणाँ म आई
रस दे द्यो भगती को
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