क्या राजा क्या रैदास (तर्ज: छोड़ गए बालम)


तर्ज: छोड़ गए बालम


क्या राजा क्या रैदास
सब छोड़-छोड़ कर चले गए
कब किसने निभाया साथ
कर वादे तोड़ कर चले गए

फूँक निकल जाएगी तन से
अर्थी तुरंत सजायेंगे
चार लोग काँधे पर थामे
मरघट तक ले जाएँगे
इस अंतिम पथ पर आज
मुख मोड़-मोड़ सब चले गए
क्या राजा क्या रैदास...

इस रस्ते से सबको है जाना
डेरा वहीं लगाना है
नेक भलाई की ले-ले खर्ची
फिर क्यूँ कर पछताना है
पछताए न बनती बात
जब साँसों का दामन तोड़ गए
क्या राजा क्या रैदास...

मन सब जाने फिर भी न माने
माया में फँसता जाए
तेरी-मेरी कर के पाप की
मटकी को भरता जाए
पाए प्रभु-चरणों में धाम
गर मटकी को फोड़ के चले गए
क्या राजा क्या रैदास...

कोई न अपना, कोई पराया
कोई न देगा साथ
'शोभा' कहे गोपाल भजो रे
पकड़ेगा वो ही हाथ
तेरा प्रभु ही निभाये साथ
गर नाम की चादर ओढ़ गए
क्या राजा क्या रैदास...

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