मेरे श्याम प्रभु की तो (तर्ज: क्या खूब लगती हो)


तर्ज: क्या खूब लगती हो


मेरे श्याम प्रभु की तो महिमा निराली है
हैं काले-काले बाल, आँखें सुरमे वाली है
मस्तक पर मोर-मुकुट हमें अच्छा लगता है
झूठी दुनिया सारी तू सच्चा लगता है

रूठे रहोगे कब तक, बोलो कब तक
हम भी न मानेंगे तुम न आओगे जब तक
जीवन का हर रिश्ता हमें कच्चा लगता है
झूठी दुनिया सारी...

मेरे नैनन बीच समाओ, हाँ समाओ
मेरे मन मंदिर में भक्ति का दीप जलाओ
भक्ति का दीपक हमको अच्छा लगता है
झूठी दुनिया सारी...

मैंने लिया आसरा तेरा, हाँ तेरा
तुझे 'शोभा' पुकारे, बनना होगा मेरा
तुम मेरे मन में बसों हमें अच्छा लगता है
झूठी दुनिया सारी...

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