तर्ज: नाचे नन्दलाल नचावे बाँकी मैय्या
राम जी को ध्यान मन कृष्ण में लगाजे रे
दुःख मिटे सारा सुख का ढोल-नगाड़ा बाजे रे
कृष्ण के हाथ मुरलिया सोवे
राम जी के कर देखो धनुष विराजे रे
मोर पाँख कृष्णा सिर सोवे
राम जी के शीश पर मुकुट विराजे रे
राधा जी बृषभानु दुलारी
हृदय पटल पर राधा जी विराजे रे
जनकपुरी में धनुष को तोड़ा
सीता जी की माला गले राम के विराजे रे
कृष्ण ने कंस को मार गिराया
रावण शीश धरा-धूल में साजे रे
कृष्ण नाम 'शोभा' सुख आधारा
राम जी के नाम से दुःख सारा भाजे रे
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