माँ सरस्वती का धर ध्यान
दे विद्या दान
न संशय आन
करे कल्याणा
तू हर पल ध्यान लगाना
तन श्वेताम्बर तेरे सोहे
हाथों में वीणा मोहे
इस छटा को देख मेरा
मन हो गया दीवाना
तेरे चरणों में हम हैं आये
वर ज्ञान का तुझसे पाये
तुम मन में मेरे
ज्ञान का दीप जलाना
आरूढ़ हो हंस पे आओ
आसन मन-बीच लगाओ
आकर के ख़त्म करो
ये तम का खजाना
जिसने भी तुझको ध्याया
अंधियारा तुमने भगाया
बन गया वो ज्ञानी
बन गया चतुर सुजाना
'शोभा' चरणों में टेके माथा
तुम धरो शीश पर हाथा
तेरे चरणों में शीश नवाये
ये सारा ज़माना
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