तर्ज: मुझे है काम ईश्वर से
तू रट ले कृष्णा को बंदे
जगत को छोड़ जाना है
तू तज दे तृष्णा को बंदे
रिश्तों को तोड़ जाना है
नींद में सोया है बंदे
स्वप्न में खोया है बंदे
सत्य जिसे समझा है बंदे
ये लिपटे झूठ के फंदे
तू मृगतृष्णा को तज बंदे
जग से मुँह मोड़ जाना है
तू रखता एक पग धरणी
करो नहीं दूसरे की आस
निकल जाएगी जब ये श्वाँस
रहे ना तेरे कोई पास
ये काया कुंदना सी बंदे
छार बन छोड़ जाना है
लगा ले बीज भक्ति का
भजन की 'शोभा' कर खेती
तू सींच ले प्रेम जल अश्रु
दे बीज पे भाव की रेती
लगे तरु चंदना के बंदे
महक जग छोड़ जाना है
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