तर्ज: देख तेरे संसार की हालत
श्याम नहीं आयो
मन घबरायो
हिवड़ो फाट्यो जात
जिवड़ा म चैन नहीं घड़ी स्यात
गंगाजल पानी से तुझे नहलाया
चरण धोय चरणोदक पाया
सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहराया
शीश तुम्हारे मुकुट सजाया
हाथों में बाँसुरिया सोवे
थारी छटा की काईं बात
जिवड़ा म चैन...
घड़ी-घड़ी पल-पल तुझ पर वारी
श्याम प्रभु की मैंने आरती उतारी
थे हो दीन दुखी हितकारी
भावों की भेंट प्रभु चरण तिहारी
पत्थर भी हीरा बण जावे
थारी दया की काईं बात
जिवड़ा म चैन...
प्रेम भाव से प्रभु न ध्यासी
आधी रात प्रभु दौड़्यो-दौड़्यो आ सी
प्रभु चरणाँ म जो लिपटा सी
सूरज चमके, तम मिट ज्यासी
'शोभा' न प्रभु थे अपना ल्यो
आँसूड़ा झड़े दिन रात
जिवड़ा म चैन...
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