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शिव भोले दानी पीते (तर्ज: सौ साल पहले)


तर्ज: सौ साल पहले मुझे तुमसे


शिव भोले दानी पीते, भंग का प्याला है
सबसे हैं न्यारे और बड़ा मतवाला है
शिव भोले दानी पीते...

तू जटाजूट वाला, मध्य में गंगा धारे है
संग चन्द्रमा सोहे, जो लगते कितने प्यारे हैं
तू ही एक देव है जो, तीन नयनों वाला है
सबसे हैं न्यारे और...

अंग भस्मी रमाते हो, और फिर भांग चढ़ाते हो
हाथों में है डमरू, जो डम-डम डमरू बजाते हो
देखो रे देखो गल-विच, सोहे अहिमाला है
सबसे हैं न्यारे और...

अम्बर बाघ की छाला, आसन मृगछाला का है
जपते रहते जो मन्त्र, वो दशरथ लाला का है
अपनी ही धुन में पीते, राम-नाम प्याला है
सबसे हैं न्यारे और...

गर राम को पाना, तो धुन भोले की लगा लेना
गर भोले को पाना, तू धुन प्रभु राम की लगा लेना
'शोभा' की झोली भर दो, तू तो दिल वाला है
सबसे हैं न्यारे और...

श्याम तेरे चरणों की बलिहारी (तर्ज: उड़ उड़ रे म्हारा काला रे कागळा)


तर्ज: उड़ उड़ रे म्हारा काला रे कागळा


श्याम तेरे चरणों की बलिहारी
श्याम तेरे चरणों की बलिहारी
हम शरणं देवो रज थारी

तुझ में सारा विश्व समाया
तुझको ही मैंने अपना बनाया
मोर मुकुट बंशीधारी
हम शरणं देवो रज थारी

कितनों की तूने बिगड़ी बनाई
उन भक्तों की तुझको दुहाई
बिगड़ी बनावो बनवारी
हम शरणं देवो रज थारी

इन प्राणों के तुम आधारा
केवट बनकर देवो किनारा
पार लगावो नैय्या म्हारी
हम शरणं देवो रज थारी

जब भी तेरा धरें हम ध्याना
नयनों में तेरी सूरत हो श्यामा
मोर पाँख मस्तकधारी
हम शरणं देवो रज थारी

मन मंदिर में तुझे बिठाऊँ
हर पल तेरे नाम को गाऊँ
'शोभा' का दुःख मेटो दातारी
हम शरणं देवो रज थारी

श्याम नहीं आयो मन घबरायो (तर्ज: देख तेरे संसार की हालत)


तर्ज: देख तेरे संसार की हालत


श्याम नहीं आयो
मन घबरायो
हिवड़ो फाट्यो जात
जिवड़ा म चैन नहीं घड़ी स्यात

गंगाजल पानी से तुझे नहलाया
चरण धोय चरणोदक पाया
सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहराया
शीश तुम्हारे मुकुट सजाया
हाथों में बाँसुरिया सोवे
थारी छटा की काईं बात
जिवड़ा म चैन...

घड़ी-घड़ी पल-पल तुझ पर वारी
श्याम प्रभु की मैंने आरती उतारी
थे हो दीन दुखी हितकारी
भावों की भेंट प्रभु चरण तिहारी
पत्थर भी हीरा बण जावे
थारी दया की काईं बात
जिवड़ा म चैन...

प्रेम भाव से प्रभु न ध्यासी
आधी रात प्रभु दौड़्यो-दौड़्यो आ सी
प्रभु चरणाँ म जो लिपटा सी
सूरज चमके, तम मिट ज्यासी
'शोभा' न प्रभु थे अपना ल्यो
आँसूड़ा झड़े दिन रात
जिवड़ा म चैन...